अंदाज़ है उसका कहने का
कुछ कहना चाहती है ।
कुछेक लब्जों को जोड़कर
मन की बात बताती है ।।
माना गलती की हमने
पर वह भी मुझे रिझाती है ।
मेरी गलती की कीमत
अब वो क्यों ऐसे चुकाती है ।।
ऐसा क्यों मुझे लगता है
कोई पराई मुझे चाहती है ।
बनके वह मुसाफिर
राह मेरी तकती है ।।
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