कोई मुझे सुलझा दे
बुरे वक्त से रिहा दे
दर्द को मेरे रवा देकर
मुझे ख़ुद से मिला दे
मुझे जीने का अर्ज नहीं
इस दर्द का कोई मर्ज नहीं
तेरे वादों का कोई फर्ज़ नहीं
अब तेरे प्यार का सर्द नहीं।
इसलिए ही तो निख़ारा है
तेरे नफ़रत को मैंने संवारा है
जीने को कुछ पल का
अब ये ही मेरा सहारा है।
अब तू याद आता नहीं
तेरा ग़म मुझे सताता नहीं
कहना है पर तुझसे अब भी
तेरे सिवा कोई भाता नहीं।
अब तू ही मुझे सुला दे
जहर के दो घूंट पिला दे
कुछ बाकी रह गया हो तो
अब भी मुझे सजा दे।
Continue....soon
:Ankit soni