Wednesday, 5 April 2017

इश्क़ दा मौसम (R4)

फिर वो मौसम आएगा
जो इश्क़  बरसाएगा।
तू  ना  होगा उस दौर में
कोई और मुझे आजमाएगा।।

वक़्त गुजरता जाएगा
मैं उसका हो जाऊंगा।
आजमाइशों के खेल में
हर जिस्म भीग जायेगा।।

तब तुझे ख़्याल आयेगा
जब मैं बदल जाऊंगा।
जब रुह पढ़ने के वास्ते
हर रोज सट्टे लगाऊंगा।।

तेरे प्यार बदल जायेगा
मुझसे नफ़रत हो जायेगी।
फिर भी राह तेरी ताकूँगा
जब छोड़ मुझे तू जाएगी।।

यही सोच कर रो लूंगा
मेरी याद तुझे भी आएगी
तेरे  कोमल  नैनों  से
तू भी आंसू छलकाएगी।।

तुझे  ढूंढने  के  लिए
तेरे शहर को जाऊंगा
फिर तू मुझे दिख जाएगी
दिल को सुक़ून मिल जाएगा।।

कहूं  मैं  अनजाने  में
या फिर रब की मर्जी से
तू  मुझसे  टकराएगी
और आंखें भी मिल जाएंगी।।

पलभर तुमसे बातें कर
हर जख़्म मेरा भर जाएगा
हाथ  तेरा  मैं  थामूँगा
तू मेरा हमदर्द बन जाएगी।।

'Ankit soni
                                      :To be continued

Tuesday, 14 March 2017

मेरा ग़म

कोई मुझे सुलझा दे
बुरे वक्त  से रिहा दे
दर्द को मेरे रवा देकर
मुझे ख़ुद से मिला दे

मुझे जीने का अर्ज नहीं
इस दर्द का कोई मर्ज नहीं
तेरे वादों का कोई फर्ज़ नहीं
अब तेरे प्यार का सर्द नहीं।

इसलिए ही  तो निख़ारा है
तेरे नफ़रत को मैंने संवारा है
जीने  को  कुछ  पल  का
अब ये ही मेरा  सहारा है।

अब  तू  याद आता नहीं
तेरा ग़म मुझे सताता नहीं
कहना है पर तुझसे अब भी
तेरे सिवा कोई भाता नहीं।

अब  तू  ही मुझे  सुला दे
जहर के दो  घूंट पिला दे
कुछ बाकी रह गया हो तो
अब भी  मुझे  सजा  दे।
                                  Continue....soon
:Ankit soni