Tuesday, 14 March 2017

मेरा ग़म

कोई मुझे सुलझा दे
बुरे वक्त  से रिहा दे
दर्द को मेरे रवा देकर
मुझे ख़ुद से मिला दे

मुझे जीने का अर्ज नहीं
इस दर्द का कोई मर्ज नहीं
तेरे वादों का कोई फर्ज़ नहीं
अब तेरे प्यार का सर्द नहीं।

इसलिए ही  तो निख़ारा है
तेरे नफ़रत को मैंने संवारा है
जीने  को  कुछ  पल  का
अब ये ही मेरा  सहारा है।

अब  तू  याद आता नहीं
तेरा ग़म मुझे सताता नहीं
कहना है पर तुझसे अब भी
तेरे सिवा कोई भाता नहीं।

अब  तू  ही मुझे  सुला दे
जहर के दो  घूंट पिला दे
कुछ बाकी रह गया हो तो
अब भी  मुझे  सजा  दे।
                                  Continue....soon
:Ankit soni

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