लम्हा थम सा जाता है
सामने जब वो आती है
रुक जाते हैं मेरे कदम
और सांसे भी थम जाती हैं।
मासूमियत है दिल में
जाने कैसी नाराज़गी है
जब उनकी तरफ देखुँ
नजरों से नजरें चुराती हैं।
एक छोटी सी मुस्कान से
सखि को कुछ बतलाती हैं
हम समझते कुछ और
जैसे हमारा दिल बहलाती हैं।
करने को दीदार उनका
उसी जगह पर जाते हैं
जहाँ हुई थी पहली मुलाकात
वो पल खुश हो जाते हैं।
ऐतबार नहीं उनको हम पर
इसलिए दूर हो जाती हैं
जब उनसे मिलने जाऊं
चुप्पी को गले लगाती हैं।
खूबसूरत हैं वो बहुत
दिल करता बस देखता रहूं
काश कुछ ऐसा होता
बारे में उनके लिखता रहूं।
इंतजार है उनका मुझे
जब कभी वो आएंगी
ख्वाहिशें बढ़ जाएंगी
खामोशियां थम जाएंगी
इस अधूरेपन को जिंदगी मिल जाएगी।
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