तेरे एक छुवन भर से
रोम-रोम मेरा खिल जाता
बाहों में तुझको भर जब
तन को तेरे तड़पता ।
तेरे उन गीले आँखों से
नयन को अपने भर पाता
फिर प्यार के दो बातें कर
दिल को तेरे बहलाता ।
अहसास भरे उस पल से
फिर से गर मैं मिल पाता
सारे जहां को छोड़ कर
भागा पास तेरे आता ।
इतना सब कुछ कहने से
अगर कुछ ऐसा हो पाता
तो ये बातें पूरी कर
तुझको खुद से मिलवाता ।
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